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तो अब पेयजल के मामले में आत्मनिर्भर बनेगी दिल्ली

नई दिल्ली। पानी की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर के कारण दिल्ली में पेयजल किल्लत बड़ी समस्या है। पर पेयजल जरूरतों के लिए दिल्ली अब दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहेगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पानी के मामले में दिल्ली आत्मनिर्भर बरेगी। इसके लिए सरकार ने तीन स्तरीय कार्ययोजना तैयार की है।बाढ़ के पानी को भूमिगत जलाशयों में भंडारण, राजधानी के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय स्तर पर वर्षाजल संचयन से भूजल स्तर बढ़ाकर व सीवरेज के शोधित पानी को तालाबों में संग्रहित कर दिल्ली को पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 20 हजार लीटर मुफ्त पानी आपूर्ति की योजना के लिए 467 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग को विभिन्न परियोजनाओं के लिए 215 करोड़ का आवंटन किया गया है। दिल्ली में प्रतिदिन करीब 1125 एमजीडी पानी की जरूरत होती है। जबकि 900 एमजीडी पानी की आपूर्ति हो पाती है।सीवरेज के शोधित पानी का बेहतर इस्तेमालइसे ध्यान में रखते हुए सरकार सीवरेज के शोधित पानी के बेहतर इस्तेमाल की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा सीवरेज के शोधित पानी के भंडारण के लिए नहर, नालों व जलाशयों के जीर्णोद्धार की योजनाएं हैं। इसके तहत नजफगढ़, सप्लीमेंट्री व शाहदरा ड्रेन के जुड़े नालों का जीर्णोद्वार भी किया जाएगा। बाढ़ व सिंचाई नियंत्रण विभाग नालों के जीर्णोद्धार व भूजल स्तर में सुधार की एक परियोजना पर 100 करोड़ खर्च करेगा।159 जलाशयों का होगा जीर्णोद्धारइसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड ने 159 जलाशयों के जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है। इसमें से पांच जलाशयों के जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है। तीन नए जल शोधन संयंत्रों का होगा निर्माण द्वारका में 50 एमजीडी का नया जल शोधन संयंत्र बनेगा। इस संयंत्र को कच्चे पानी की आपूर्ति कोरोनेशन पिलर सीवेज शोधन प्लांट से की जाएगी। सीवरेज शोधन संयंत्रों से उपचारित पानी को यमुना के बहाव में शामिल कर जल शोधन संयंत्रों में दोबारा शोधित कर पेयजल आपूर्ति की योजना है। इससे 246 एमजीडी अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा। बजट में कहा गया है कि दो हजार करोड़ की लागत से चंद्रावल में 105 एमजीडी का और दो हजार दो सौ करोड़ की लागत से वजीराबाद में 120 एमजीडी का नया जल शोधन संयंत्र बनाया जा रहा है।बिछाई जा रही पाइप लाइन142 कालोनियों में बिछाई जा रही पानी की पाइपलाइन चार सालों में 406 अनधिकृत कॉलोनियों में पानी की पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। इसके अलावा 142 कालोनियों में पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है।100 वर्ग मीटर से अधिक प्लॉटों के लिए वर्षा जल संरक्षणभवन नियमों के प्रावधानों के मुताबिक 100 वर्ग मीटर से अधिक आकार के प्लॉटों के लिए वर्षा जल संरक्षण अनिवार्य है। जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिहाज से 100 वर्गमीटर से अधिक आकार के प्लॉटों के मालिकों को पानी के बिलों में 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। 500 वर्गमीटर से अधिक आकार के प्लॉट मालिकों की ओर से वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था नहीं किए जाने पर उनपर जुमार्ना सहित पानी का बिल भी डेढ़ गुणा कर दिया जाएगा।हरियाणा पर कम होगी निर्भरताहरियाणा से दिल्ली को रोजाना करीब 150 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जाती है। मानसून के दौरान छह लाख क्यूसेक पानी दिल्ली के लिए छोड़ा जाता है। लेकिन दिल्ली के पानी के लिहाज से आत्मनिर्भर बन जाने पर पानी में अमोनिया के कारण अशुद्धता और प्रदूषण की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। द्वारका में 50 एमजीडी क्षमता का नया जल शोधन संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है। इन प्रयासों से दिल्ली को करीब 246 एमजीडी अतिरिक्त पानी की उपलब्धता होगी।.